
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शिक्षा के उद्देश्य को नया आयाम दिया है। एक प्रमुख शैक्षणिक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र सेवा का प्रमुख माध्यम है।
उनके इस कथन ने युवाओं के बीच उत्साह भर दिया। मुर्मू ने छात्रों से अपील की कि वे ज्ञान को व्यक्तिगत लाभ तक सीमित न रखें, बल्कि इसे देशहित में लगाएं। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरणों से समझाया कि कैसे विद्वानों ने शिक्षा के बल पर राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया।
राष्ट्रपति ने पाठ्यक्रम में नैतिकता, पर्यावरण जागरूकता और सामाजिक दायित्व को शामिल करने पर जोर दिया। ‘आपकी डिग्री सफलता का प्रमाण मात्र न हो, सेवा का प्रतीक बने,’ उन्होंने कहा।
कार्यक्रम में मौजूद शिक्षाविदों और अधिकारियों ने उनके विचारों का समर्थन किया। कई संस्थानों ने पाठ्यक्रम सुधार की घोषणा की। यह संदेश भारत के विकास लक्ष्यों से पूरी तरह मेल खाता है।
राष्ट्रपति मुर्मू का यह उद्बोधन शिक्षा को नई दिशा देगा। युवा पीढ़ी को सेवा के लिए प्रेरित करते हुए उन्होंने एक मजबूत भारत की नींव रखी है।