
नई दिल्ली में शुक्रवार को आयोजित महत्वपूर्ण कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अखिल भारतीय सम्मेलन का उद्घाटन किया और ब्रह्म कुमारीज के ‘सशक्त भारत के लिए कर्मयोग’ राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत की। उन्होंने गुरुग्राम के ओम शांति रिट्रीट सेंटर के रजत जयंती समारोह का भी शुभारंभ किया।
अपने प्रभावशाली संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि सच्चा विकास भौतिक उन्नति के साथ नैतिकता और आध्यात्मिकता का मेल है। आर्थिक प्रगति समृद्धि लाती है, प्रौद्योगिकी नवाचार को बढ़ावा देती है, लेकिन बिना नैतिक आधार के ये असंतुलन पैदा करते हैं।
अनैतिक विकास धन के केंद्रीकरण, पर्यावरण हानि और कमजोर वर्गों के शोषण को जन्म देता है। प्रौद्योगिकी का दुरुपयोग मानवता के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।
आध्यात्मिकता मूल्य प्रदान करती है जो कर्मयोग—निष्काम सेवा—की प्रेरणा देती है। यह सत्यनिष्ठा, करुणा, अहिंसा और सेवा के गुण सिखाती है, जो न्यायपूर्ण समाज की नींव हैं।
आध्यात्मिक विचार स्वार्थ त्यागकर सर्वहित की सोच जगाते हैं। इससे प्रशासन निष्पक्ष होता है, समाज में विश्वास बढ़ता है।
ब्रह्म कुमारीज का राजयोग केवल ध्यान नहीं, बल्कि कर्तव्य पालन के साथ आध्यात्मिकता है। लाखों अनुयायी इससे सार्थक जीवन जी रहे हैं।
राष्ट्रपति ने आशा जताई कि कर्मयोग से हर नागरिक भारत के समग्र विकास में भागीदार बनेगा, जो विश्व के लिए मूल्यवान जीवन का मॉडल बनेगा।