
गर्भावस्था किसी भी महिला के जीवन का एक अनमोल पड़ाव है, जहां खुशी के साथ-साथ कई चुनौतियां भी आती हैं। हार्मोनल बदलावों से मूड में उतार-चढ़ाव, थकान और तनाव जैसी परेशानियां आम हैं। लेकिन रोजाना प्राणायाम करने से इन सबका सामना आसानी से किया जा सकता है। यह सांसों पर नियंत्रण की प्राचीन विद्या मां और शिशु दोनों के लिए वरदान साबित होती है।
प्राणायाम से शरीर को भरपूर ऑक्सीजन मिलती है, मन शांत होता है और अंदरूनी शांति का अनुभव होता है। आयुष मंत्रालय ने अपने सोशल मीडिया पर गर्भावस्था में इसके लाभ बताते हुए कुछ खास प्राणायामों की सलाह दी है।
नाड़ी शोधन प्राणायाम सबसे प्रभावी है। एक नासिका से श्वास लेना और दूसरी से छोड़ना नाड़ियों को शुद्ध करता है, तनाव घटाता है और एकाग्रता बढ़ाता है। सुबह मात्र 10 मिनट का अभ्यास चमत्कारिक परिणाम देता है।
शीतली प्राणायाम गर्मी और बेचैनी में राहत देता है। जीभ को नली की तरह लपेटकर श्वास ग्रहण करें, नाक से छोड़ें। इससे शरीर शीतल होता है और पाचन संबंधी समस्याएं दूर होती हैं।
भ्रामरी प्राणायाम में श्वास त्यागते हुए भौंरे जैसी ध्वनि करें। यह मस्तिष्क को स्थिर करता है, नींद सुधारता है और चिंता को जड़ से मिटाता है।
इनका अभ्यास आसान है, न समय ज्यादा लगता है न सामान। हल्की सैर, संतुलित आहार और विश्राम के साथ मिलाकर अपनाएं। मां की मानसिक शांति शिशु की सेहत की कुंजी है।
शुरू करने से पूर्व चिकित्सक से परामर्श अनिवार्य है। प्राणायाम के साथ गर्भावस्था को बनाएं खुशहाल यात्रा।
