
मध्य प्रदेश के दमोह जिले के ग्रामीण इलाकों में एक चमत्कारिक बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्ज्वला योजना ने यहां की महिलाओं को धुएं भरी रसोई से आजादी दिला दी है। आग का धुआं अब इतिहास बन चुका है, और स्वच्छ गैस सिलेंडर ने नई जिंदगी का आगमन किया है।
बदवानी गांव की सुनीता बाई बताती हैं, ‘पहले लकड़ियां जुटाने में आधा दिन निकल जाता था। आंखें जलतीं, बच्चों को सांस की तकलीफ होती। अब गैस पर खाना बनता है, समय बचता है।’ जिले में 15,000 से अधिक कनेक्शन वितरित हो चुके हैं।
इस योजना का असर बहुआयामी है। महिलाएं अब सिलाई सीख रही हैं, छोटे दुकानें चला रही हैं। घरेलू उत्पादकता में 25 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। स्वास्थ्य सर्वे बताते हैं कि फेफड़ों की बीमारियां घटी हैं।
स्थानीय प्रशासन की सक्रियता सराहनीय है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और महिला समूह हर पात्र परिवार तक योजना पहुंचा रहे। जिला कलेक्टर कहते हैं, ‘यह केवल गैस नहीं, बल्कि सम्मान और अवसर है।’
दमोह की यह कहानी पूरे देश के लिए प्रेरणा है। पीएम मोदी का सपना साकार हो रहा – ग्रामीण भारत आत्मनिर्भर बने। स्वच्छ ऊर्जा ने महिलाओं को सशक्त बनाया, समाज को मजबूत किया। भविष्य उज्ज्वल है।