
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम ने अंगदान के प्रति देशव्यापी जागरूकता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (एनओटीटीओ) के निदेशक डॉ. अनिल कुमार ने इसे नेक और प्रेरक अभियान करार देते हुए कहा कि इससे जन-भागीदारी बढ़ेगी और लाखों जिंदगियां बचेंगी।
131वें संस्करण में पीएम ने केरल की उस 10 माह की बच्ची की कहानी साझा की, जिनके माता-पिता ने अंगदान कर चार लोगों को नया जीवन दिया। डॉ. कुमार के अनुसार, ऐसी सच्ची घटनाएं समाज के संकोच और मिथ्यों को तोड़ती हैं, अंगदान को करुणा का प्रतीक बनाती हैं।
दिल्ली की एक महिला, जिनका हृदय प्रत्यारोपण हुआ, पहले चलने में असमर्थ थीं। अब वे केदारनाथ-नीलकंठ तीर्थ यात्रा कर परिवार की जिम्मेदारियां निभा रही हैं। इसी प्रकार, हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट कराने वाले युवक, जो पहले ऑक्सीजन पर थे, दो बार 14,000 फीट वाले नाथुला पास पर पहुंच चुके हैं।
डॉ. कुमार ने जोर दिया कि समय पर प्रत्यारोपण से व्यक्ति न केवल स्वस्थ होता है, बल्कि समाज में सक्रिय योगदान देता है। मृत्यु के बाद अंग जलाने-दफनाने के बजाय दान क्यों न करें? यह कार्य जाति-धर्म से ऊपर है।
देश में एकीकृत डिजिटल नेटवर्क ट्रांसप्लांट अस्पतालों, ऊतक बैंकों और राज्य संगठनों को जोड़ता है, जो समन्वय और पारदर्शिता सुनिश्चित करता है। एनओटीटीओ राष्ट्रीय स्तर पर, पांच क्षेत्रीय और राज्य इकाइयों के साथ बड़ा जाल बुन चुका है।
अंगों की मांग अधिक, दान कम। एक दान से दो किडनी, लिवर, हृदय, फेफड़े, पैंक्रियाज, आंत—आठ जिंदगियां बच सकती हैं। कॉर्निया, त्वचा, हड्डी से औरों की जिंदगी बेहतर। एनओटीटीओ वेबसाइट पर आधार से एक मिनट में प्रतिज्ञा, हेल्पलाइन 1800-114-770 पर सहायता। परिवार को बताएं, क्योंकि अंतिम सहमति उनकी।
पीएम की अपील से अभियान को नई ताकत मिली है। एनओटीटीओ गांव-गांव संदेश पहुंचाएगा, ताकि अधिक प्रत्यारोपण हो सकें।