
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को गुजरात के सोमनाथ मंदिर में स्वाभिमान पर्व का शुभारंभ करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि यह आयोजन ऐतिहासिक विध्वंस की स्मृति नहीं, बल्कि मंदिर की हजार वर्षीय गौरवमयी यात्रा का प्रतीक है। समुद्र तट पर बसे इस पावन धाम में पीएम मोदी ने देशवासियों को सांस्कृतिक धरोहर की अटूट शक्ति का बोध कराया।
सोमनाथ, बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रधान, सदियों से सनातन धर्म का प्रतीक रहा है। उन्होंने बताया कि मंदिर पर 17 बार आक्रमण हुए, फिर भी आस्था की ज्योति कभी मंद नहीं पड़ी। गजनवी के 1026 के आक्रमण से लेकर स्वतंत्र भारत में सरदार पटेल द्वारा 1951 में पुनर्निर्माण तक, यह स्थल पुनरुत्थान की कहानी कहता है।
पीएम मोदी ने कहा, ‘यह पर्व स्वाभिमान की विजय का उत्सव है। जैसे सोमनाथ मलबे से उठा, वैसे ही आज भारत विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर है।’ कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रदर्शन, ऐतिहासिक प्रदर्शनियां और विकास परियोजनाओं की घोषणाएं हुईं।
प्रभास पाटन क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार, डिजिटल संग्रहालय और तीर्थयात्री सुविधाएं इस पर्व का हिस्सा हैं। पीएम ने सिक्के, डाक टिकट जारी किए और विशेष पूजा की। हजारों भक्तों ने हिस्सा लिया, जो इस आयोजन को राष्ट्रीय एकता का प्रतीक मान रहे हैं।
प्रसाद योजना के तहत 40 तीर्थस्थलों का विकास हो रहा है। पीएम मोदी का उद्बोधन न केवल अतीत को सम्मान देता है, बल्कि विकसित भारत के स्वप्न को प्रज्वलित करता है। सोमनाथ की यह यात्रा हर भारतीय को प्रेरित करेगी।