
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने शुरुआती दिनों की एक मार्मिक घटना साझा की, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल के मालदा रेलवे स्टेशन पर अपने युवा साथियों के साथ एक अविस्मरणीय मुलाकात का जिक्र किया। हालिया संबोधन में पीएम ने उस उत्साह और दोस्ती की याद ताजा की, जो उनकी यात्रा का अभिन्न अंग बनी रही।
मालदा, जो बंगाल का एक महत्वपूर्ण रेल जंक्शन है, इस खास पुनर्मिलन का साक्षी बना। मोदी जी ने जीवंत माहौल, हंसी-मजाक और अटूट बंधन का वर्णन किया। ‘यह मुलाकात मेरी स्मृति में हमेशा के लिए अंकित हो गई,’ उन्होंने कहा, जिससे श्रोता भावुक हो उठे।
यह व्यक्तिगत कथा समाज के निचले स्तर से मोदी जी के गहरे जुड़ाव को रेखांकित करती है। युवा कार्यकर्ता के रूप में देशव्यापी यात्राओं के दौरान ऐसी मुलाकातें उनकी सेवा भावना को प्रज्वलित करती रहीं। आज के युवाओं को प्रेरित करने के लिए वे अक्सर इन अनुभवों का सहारा लेते हैं।
इस खुलासे ने व्यापक रुचि जगाई है। सोशल मीडिया पर चर्चा जोरों पर है, जबकि इतिहासकार 1970 के दशक की मालदा यात्राओं की खोज में जुटे हैं। स्थानीय लोग उस समय के मोदी जी के आकर्षण को याद कर रहे हैं।
चुनावी माहौल में ऐसी कहानियां नेताओं को मानवीय बनाती हैं। मालदा की यह स्मृति रेलवे प्लेटफॉर्म पर बनी दोस्तियों की शक्ति को दर्शाती है, जो भारत की एकता का प्रतीक है।