
नई दिल्ली में मंगलवार को भारत मंडपम में आयोजित भारत-यूरोपीय संघ बिजनेस फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक घोषणा की। उन्होंने इसे भारत-ईयू रिश्तों में नए युग की शुरुआत का प्रतीक बताया।
पहली बार ईयू नेताओं का गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में आना, भारत का अब तक का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता और शीर्ष सीईओ सम्मेलन—ये सब दो विशाल लोकतंत्रों के बीच अभूतपूर्व सामंजस्य दर्शाते हैं। हमारे साझा मूल्य, वैश्विक स्थिरता की प्राथमिकताएं और खुली समाजों का स्वाभाविक जुड़ाव इस साझेदारी की मजबूत नींव हैं।
पिछले दस वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार 180 अरब यूरो तक दोगुना हो चुका है। भारत में 6,000 से ज्यादा यूरोपीय कंपनियां सक्रिय हैं, जबकि 1,500 भारतीय फर्में ईयू में सफलतापूर्वक काम कर रही हैं। वैश्विक बाजारों की अस्थिरता के बीच यह एफटीए उद्योगों के लिए सकारात्मक संदेश है।
पीएम ने तीन प्रमुख क्षेत्रों पर जोर दिया। पहला, व्यापार, तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों पर निर्भरता घटाने के लिए ईवी, बैटरी, चिप्स और दवाओं में सहयोग। दूसरा, रक्षा, अंतरिक्ष, टेलीकॉम और एआई में साझेदारी बढ़ाना। तीसरा, हरित हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, स्मार्ट ग्रिड, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर, सतत गतिशीलता, जल प्रबंधन, परिपत्र अर्थव्यवस्था और सतत कृषि में संयुक्त प्रयास।
यह साझेदारी विश्व की सबसे प्रभावी बनने की राह पर है, जो स्थिरता और नवाचार का प्रतीक बनेगी।