
नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत@2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया है। मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पर सवार होकर लंबे समय से अटे मुद्दों के स्थायी समाधान की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर प्रगति के बीच सत्र की शुरुआत महत्वाकांक्षी, आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर भारत की छवि को मजबूत करती है। राष्ट्रपति के अभिभाषण का उल्लेख करते हुए पीएम ने कहा कि यह 140 करोड़ भारतीयों के आत्मविश्वास और आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। सरल शब्दों में राष्ट्र प्रमुख ने सांसदों से अपेक्षाएं साझा कीं, जिन्हें सभी गंभीरता से लेंगे, ऐसा उनका विश्वास है।
21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा पूरा हो चुका है। अब अगले 25 वर्ष भारत के भविष्य और वैश्विक भूमिका को तय करेंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लगातार नौवां बजट पेश करना संसदीय इतिहास का स्वर्णिम पल है।
भारत 21वीं सदी में आशा का प्रतीक बनकर उभरा है। वैश्विक नजरें आर्थिक शक्ति और लोकतांत्रिक मजबूती पर केंद्रित हैं। ईयू समझौता भारतीय उद्योगजनों और युवाओं के लिए सुनहरे अवसर खोलेगा, जिसमें गुणवत्ता पर जोर आवश्यक है।
सरकार का मूल मंत्र ‘सुधार, प्रदर्शन, परिवर्तन’ है। सांसदों के सहयोग से रिफॉर्म एक्सप्रेस ने गति पकड़ी है। लंबे समाधान अनुमानितता लाते हैं और अंतरराष्ट्रीय भरोसा बढ़ाते हैं। हर निर्णय विकासोन्मुखी और मानव-केंद्रित है। प्रौद्योगिकी का उपयोग सोच-समझकर होगा, संवैधानिक मूल्यों से समझौता नहीं।
लोकतंत्र में आलोचना स्वाभाविक है, किंतु अंतिम छोर तक डिलीवरी पर आम सहमति है। यह फाइलों का आगे बढ़ना नहीं, जीवन परिवर्तन है। रिफॉर्म एक्सप्रेस से अगली पीढ़ी के सुधार जारी रहेंगे। भारत का लोकतंत्र विश्व को हमारी क्षमताओं और प्रतिबद्धता का प्रमाण देता है, जिसका स्वागत हो रहा है।