
जादू की दुनिया में एक नाम जो चमकता है, वह है पीसी सरकार। 23 फरवरी 1913 को अविभाजित बंगाल के अशेकपुर गांव में जन्मे प्रतुल चंद्र सरकार ने सात पीढ़ियों की रहस्यवादी परंपरा को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। 9 अप्रैल 1956 को लंदन के बीबीसी पैनोरामा कार्यक्रम में उनके एक करतब ने पूरे ब्रिटेन को हिलाकर रख दिया।
लाइव प्रसारण में उन्होंने अपनी सहायक को सम्मोहित कर टेबल पर लिटाया और इलेक्ट्रिक आरी चला दी। जैसे ही आरी उसके पेट के पास पहुंची, स्क्रीन काली पड़ गई। दर्शक स्तब्ध—क्या टीवी पर हत्या हो गई? फोन लाइनें जाम, अखबारों की सुर्खियां चीखीं। लेकिन यह जीनियस पीसी सरकार की चतुर पीआर चाल थी, जिसने उन्हें रातोंरात विश्वश्रेष्ठ शोमैन बना दिया।
गणित में स्नातक, सरकार का जादू ज्यामिति, प्रकाशिकी और मनोविज्ञान का विज्ञान था। गुरु गणपति चक्रवर्ती के सान्निध्य में उन्होंने इसे ‘इंद्रजाल’ नाम दिया। पश्चिमी पूर्वाग्रहों को तोड़ते हुए, वे महाराजा के वेश में लंदन-पेरिस के मंचों पर धूम मचाते।
उनका राष्ट्रभक्ति का अध्याय गुप्त है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस से कलकत्ता में मुलाकात ने उन्हें गुप्तचर बना दिया। जादुई बक्सों में दस्तावेज छिपाकर ब्रिटिश पुलिस को चकमा दिया। 1932 में जापान जाकर रासबिहारी बोस के साथ स्वतंत्रता कोष भरते रहे।
‘भारत का जल’ कभी न सूखने वाला, ‘एक्स-रे दृष्टि’ भाषाओं को अंधेरे में पढ़ने वाला—ये करतब वैज्ञानिकों को पसीना छुड़ाते। जादू को ‘माया’ और 13 रसों से जोड़कर उन्होंने 1954 में ऑल इंडिया मैजिक सर्कल बनाया। 22 पुस्तकें लिखीं। 6 जनवरी 1971 को वे चले गए, लेकिन विरासत अमर है।