
भारतीय नौसेना की जलमग्न क्षमताओं को मजबूत करने वाली स्वदेशी तकनीकों की समीक्षा के लिए रक्षा पर संसदीय स्थायी समिति ने मंगलवार को विशाखापत्तनम स्थित नौसेना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला (एनएसटीएल) का दौरा किया। राधा मोहन सिंह की अध्यक्षता वाली इस समिति ने एनएसटीएल के विभिन्न उन्नत उत्पादों का बारीकी से अवलोकन किया।
समिति ने एएलडब्ल्यूटी, वरुणास्त्र, ईएचडब्ल्यूटी जैसे टॉरपीडो, एमआईजीएम व पीबीजीएम माइंस, एसएफडी व टर्बस्टर डेकोय सिस्टम, स्मार्ट, एचईएयूवी, स्वार्म ड्रोन, जलमग्न हथियार प्रणालियों सहित कई तकनीकों का निरीक्षण किया। ये सभी डीआरडीओ की देन हैं जो नौसेना की जरूरतों को पूरा करती हैं।
सी-कीपिंग एंड मैन्यूवरिंग बेसिन में स्केल-डाउन जहाज मॉडल पर हाइड्रो-डायनामिक परीक्षण का जीवंत प्रदर्शन देखकर सदस्य प्रभावित हुए। यह सुविधा जहाजों व जलमग्न यानों के प्रदर्शन का परीक्षण करती है।
डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत, डॉ. आर.वी. हारा प्रसाद व एनएसटीएल निदेशक डॉ. अब्राहम वर्गीस ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। निदेशक ने चल रही आरएंडडी, उद्योग-शिक्षा सहयोग व भविष्य के रोडमैप पर प्रकाश डाला, जिसमें समुद्री व जलमग्न डोमेन जागरूकता शामिल है।
समिति ने इन प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की, जो भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए अनिवार्य हैं। यह दौरा आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देगा।