
नई दिल्ली: देश की संसद ने पान मसाला (Pan Masala) निर्माताओं पर एक नया स्वास्थ्य सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर (Health Security and National Security Cess Bill, 2025) लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह बिल अब लोकसभा में पारित हो चुका है और राज्यसभा से भी वापस आ गया है। इस नए उपकर का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाना है।
**क्या है नया उपकर?**
इस कानून के तहत, पान मसाला उत्पादन इकाइयों पर माल और सेवा कर (GST) के अलावा एक अतिरिक्त उपकर लगाया जाएगा। यह उपकर सीधे तौर पर फैक्ट्रियों में लगी मशीनों की उत्पादन क्षमता पर आधारित होगा। वर्तमान में, पान मसाला, तंबाकू और संबंधित उत्पादों पर 28% जीएसटी के साथ-साथ विभिन्न दरों पर क्षतिपूर्ति उपकर (compensation cess) भी लगता है। क्षतिपूर्ति उपकर की अवधि समाप्त होने के बाद, जीएसटी दर 40% तक बढ़ सकती है। इसके अतिरिक्त, तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क (excise duty) जारी रहेगा, जबकि नया उपकर विशेष रूप से पान मसाला को लक्षित करेगा।
**वित्त मंत्री ने किया बचाव**
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि यह उपकर राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी आवश्यक वस्तु पर नहीं, बल्कि केवल ‘डीमेरिट गुड्स’ (demerit goods) यानी हानिकारक वस्तुओं पर लगाया जाएगा। सीतारमण ने उच्च-तकनीकी युद्ध के युग में रक्षा तैयारियों के लिए समर्पित और विश्वसनीय धन की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि आधुनिक संघर्षों में सटीक हथियार, स्वायत्त प्लेटफॉर्म, अंतरिक्ष-आधारित संपत्ति और साइबर ऑपरेशन जैसी चीजों में भारी पूंजी निवेश की आवश्यकता होती है।
**रक्षा के लिए स्थिर धन क्यों जरूरी?**
वित्त मंत्री ने तेजी से बदलते प्रौद्योगिकी परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि लगातार उन्नयन (upgrades) आवश्यक हैं। उन्होंने कहा, “प्रौद्योगिकी एक तेजी से बढ़ता हुआ क्षेत्र है, इसलिए आपको प्रौद्योगिकी को लगातार अपडेट करते रहना होगा, जिसमें निवेश की आवश्यकता होती है।” उन्होंने यह भी कहा कि देश को सशस्त्र बलों को सुसज्जित और तैयार रखने के लिए एक स्थिर राजस्व धारा की आवश्यकता है। यह नया उपकर नागरिकों के स्वास्थ्य और सैन्य तैयारियों दोनों को मजबूत करने का एक व्यवहार्य तरीका प्रदान करता है।
**राज्यों को भी मिलेगा हिस्सा**
वित्त मंत्री ने उन चिंताओं को भी दूर किया कि राज्यों को इससे नुकसान होगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस उपकर का एक हिस्सा राज्यों के साथ भी साझा किया जाएगा। उन्होंने विपक्षी दलों के उन दावों को खारिज कर दिया कि राज्यों को इस नए उपकर से घाटा होगा।
