
मुंबई के शास्त्रीय संगीत जगत में जारी विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। युवा सितार वादक ऋषभ रिखीराम शर्मा द्वारा खुद को पंडित रविशंकर का आखिरी शिष्य बताने के दावे को उनके आधिकारिक संगीत संस्थान ने सिरे से खारिज कर दिया है। अनुष्का शंकर द्वारा पहले ही झूठा करार दिए जाने के बाद यह बयान विवाद को पूरी तरह सुलझाने वाला साबित हो रहा है।
संस्थान ने स्पष्ट किया कि भले ही पंडितजी ने ऋषभ को कुछ कक्षाएं दीं, लेकिन कभी औपचारिक दीक्षा या गुरु-शिष्य संबंध की घोषणा नहीं की गई। न तो पारंपरिक रीति से पुजारी की उपस्थिति में कोई समारोह हुआ, न ही घंटों का गहन शिक्षण। 10 फरवरी 2012 को व्हीलचेयर पर पधारे पंडितजी ने ऋषभ के कार्यक्रम में केवल दर्शकों से उनका परिचय कराया, जिसमें कहा, ‘यह नया युवा लड़का अभी मेरा शिष्य बना है और मैंने उसे कुछ पाठ पढ़ाए हैं।’ लेकिन यह टिप्पणी वहीं सीमित रही, बाद में कभी दोहराई नहीं गई।
ऋषभ का मुख्य प्रशिक्षण परिमल सदाफल के मार्गदर्शन में हुआ। संस्थान के अनुसार, पंडितजी के सबसे छोटे शिष्य शुभेंद्र राव और अनुष्का शंकर हैं, जबकि अंतिम औपचारिक शिष्य निषाद गाडगिल व डॉ. स्कॉट आइजमैन। इस स्पष्टीकरण से ऋषभ के दावे गलत सिद्ध हो चुके हैं।
शास्त्रीय रागों को आधुनिक अंदाज में पेश करने के लिए मशहूर ऋषभ का ‘शिव कैलाशों के वासी’ बेहद लोकप्रिय रहा। लेकिन यह घटना भारतीय शास्त्रीय संगीत की पवित्र परंपराओं की अहमियत रेखांकित करती है, जहां शिष्यत्व कोई हल्की बात नहीं। विवाद के बाद संगीत प्रेमी अब ऋषभ के भविष्य पर नजर रखे हुए हैं।