
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर हिंदू धर्म की उन पांच महान नारियों की चर्चा करना अत्यंत प्रासंगिक है, जिन्हें पंचकन्या कहा जाता है। ब्रह्म पुराण के प्रसिद्ध श्लोक में अहल्या, द्रौपदी, तारा, कुंती और मंदोदरी का स्मरण करने का विधान है, जो महापापों का नाश करता है। ये स्त्रियां देवी तो नहीं, किंतु उनके धैर्य, बुद्धि और संघर्ष ने उन्हें पूजनीय बना दिया।
अहल्या, गौतम ऋषि की सुंदरी पत्नी, इंद्र के छल का शिकार बनीं। श्रापित होकर पाषाण बन गईं, किंतु राम चरण स्पर्श से मुक्त हुईं। यह कथा विश्वासघात से उबरने की प्रेरणा देती है। द्रौपदी ने चीरहरण के अपमान का बदला युद्ध से लिया, न्याय की मांग को नया आयाम दिया।
तारा ने बाली की मृत्यु के बाद सुग्रीव से विवाह कर वानर राज्य को संभाला, अपनी नीतियों से स्थिरता लाई। कुंती ने कष्टपूर्ण जीवन में पांडवों को धर्म का पाठ पढ़ाया, त्याग की मिसाल कायम की। मंदोदरी, रावण की विदुषी पत्नी, बार-बार पति को सीता हरण त्यागने की नसीहत देती रहीं, शिव भक्ति में लीन रहीं।
इनकी कहानियां सिखाती हैं कि विपत्ति में नैतिकता न छोड़ें। आज की महिलाओं के लिए ये आदर्श हैं, जो साहस से जीवन जीने का संदेश देती हैं। धार्मिक अनुष्ठानों में इनका स्मरण आज भी जारी है।