
केरल की राजनीति में बड़ा उलटफेर। 66 वर्षीय पद्मजा वेणुगोपाल, दिवंगत के. करुणाकरण की बेटी, चौथी बार चुनावी ring में उतरने को तैयार हैं, लेकिन इस बार भाजपा के बैनर तले। पहले तीन बार कांग्रेस से हारीं, अब नया अध्याय शुरू करने का मन बना लिया है।
करुणाकरण का नाम केरल राजनीति का पर्याय था। चार बार मुख्यमंत्री रहीं, उन्होंने बेटे के. मुरलीधरन को 1989 में सीपीआई(एम) के इंबीची बाबू को हराकर सक्रिय राजनीति में उतारा। परिवार का दबदबा चरम पर पहुंचा।
पद्मजा का सफर भाई से अलग रहा। 2004 में मुकुंदपुरम से पहली हार। पिता के प्रभाव के घटने और स्वास्थ्य खराब होने से अवसर कम हुए। 2016 और 2021 में त्रिशूर से लड़ीं, 2021 में मात्र 946 वोटों से हारीं।
कांग्रेस में नजरअंदाजी से तंग आकर 2024 लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुईं। अब त्रिशूर से फिर मैदान में उतरने के संकेत हैं। इलाके के बदले समीकरणों में यह कदम खेल बदल सकता है, जो विरासत को नई दिशा देगा।