
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक शांति और शारीरिक मजबूती की तलाश हर किसी की है। पादहस्तासन योग का एक ऐसा आसन है जो रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और मन को सुकून देता है। हठयोग की परंपरा में इस आसन को विशेष स्थान प्राप्त है और यह सूर्य नमस्कार का अभिन्न अंग माना जाता है।
इसे करने के लिए सीधे खड़े होकर सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें। हाथों से पैरों को छूने या फर्श को सहारा देने की कोशिश करें। इससे पीठ, कमर और पैरों की मांसपेशियां खिंचती हैं, जिससे पूरे शरीर में लचीलापन आता है।
आधुनिक जीवनशैली में घंटों मोबाइल या लैपटॉप के सामने झुकने से रीढ़ पर दबाव पड़ता है। यह आसन उस दबाव को दूर करता है, रक्त संचार बढ़ाता है और ऊर्जा का संचार करता है। पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है, कब्ज दूर करता है और पेट की अतिरिक्त चर्बी घटाने में सहायक है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन आंतरिक अंगों की मालिश करता है, मासिक धर्म की पीड़ा में राहत देता है। सिर की ओर रक्त का बहाव बढ़ने से दिमाग ताजा होता है, आंखों को लाभ मिलता है और तनाव कम होता है।
ध्यान रखें, योग अपनी क्षमता के अनुसार करें। जबरदस्ती नुकसानदेह हो सकती है। गर्भवती महिलाएं, सर्जरी कराने वाले या गंभीर रोगी योग गुरु की सलाह लें। रोजाना अभ्यास से स्वस्थ और शांत जीवन पाएं।