
हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा प्रहार किया। मस्जिद-ए-चौक में जुमे की नमाज के बाद आयोजित जलसे में उन्होंने पीएम के इजरायल समर्थन को नफरत की वैचारिक नींव का बताया।
ओवैसी ने गाजा में 73,000 फिलिस्तीनियों की हत्या का जिक्र करते हुए इजरायल को दुनिया का एकमात्र नस्लवादी देश कहा। वेस्ट बैंक और गाजा को खुली जेल बने होने और घरों पर बुलडोजर चलाने की निंदा की। उन्होंने कहा कि हमास की गलती बता सकते हैं, लेकिन इजरायली आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
नेतन्याहू के खिलाफ आईसीसी वारंट का हवाला देकर ओवैसी ने पीएम के दौरे की आलोचना की। जायोनिस्ट और आरएसएस के बीच 1960 के दशक से रिश्तों का खुलासा किया, मुंबई में गुप्त बैठकों और गोडसे भाई की 1973 मुलाकात का जिक्र किया।
ग्लोबल साउथ में भारत की इज्जत दांव पर लगी है, चेतावनी दी। फिलिस्तीन मुसलमानों की तीसरी पवित्र भूमि होने के साथ इंसाफ का सवाल है। बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार का मुद्दा उठाने वालों को शेख हसीना को वापस भेजने की सलाह दी।
अमेरिका-ईरान तनाव पर पीएम की खामोशी पर सवाल उठाए, रूस को शांति की सीख देने वाले चुप क्यों? ओवैसी का यह बयान भारत की विदेश नीति पर बहस छेड़ रहा है।