
गुजरात के सोमनाथ में ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के तहत 500 से अधिक साधु-संतों ने डाक डमरू बजाते हुए भव्य शौर्य यात्रा निकाली। यह यात्रा न केवल आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि हिंदू संस्कृति के गौरव को पुनर्जीवित करने का संकल्प भी ले गई।
सोमनाथ मंदिर से प्रारंभ हुई यह यात्रा समुद्र तटवर्ती मार्गों से गुजरी, जहां भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। केसरिया वस्त्र धारण किए साधुओं ने भगवान शिव के जयकारे लगाए और वैदिक मंत्रों का जाप किया। डमरू की थापें चारों ओर गूंजीं, जो शिव की तांडव नृत्य की याद दिला रही थीं।
यह आयोजन सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक पुनर्निर्माण की स्मृति को समर्पित था, जो आक्रमणों के बावजूद अटल खड़ा रहा। आयोजकों ने कहा कि यह यात्रा सनातन धर्म की रक्षा के लिए एकजुटता का संदेश देती है। स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था में कोई कसर नहीं छोड़ी।
यात्रा का समापन विशाल सभा में हुआ, जहां प्रवचन और हवन आयोजित किए गए। यह पर्व आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और युवाओं में संस्कृति के प्रति जागरूकता लाने का माध्यम बनेगा। सोमनाथ अब स्वाभिमान की नई लहर का केंद्र बन चुका है।