
ऑपरेशन सिंदूर के एक साल पूरे होने पर भारतीय नौसेना की उन गुमनाम कारनामों का खुलासा हो रहा है, जिन्होंने पाकिस्तानी नौसेना को उसके बंदरगाहों में कैद कर दिया। प्रत्यक्ष हमला न करने के बावजूद, पनडुब्बियों ने दुश्मन के जलक्षेत्र में घुसकर ऐसा दबाव बनाया कि पाकिस्तान की पूरी नौसेना ठप्प पड़ गई।
22 अप्रैल के बाद आईएनएस विक्रांत के नेतृत्व में कैरियर बैटल ग्रुप आगे तैनात हुआ, साथ में पनडुब्बियां पाक सीमा में घुसीं और मनोवैज्ञानिक दबाव डाला। चार पनडुब्बी कमांडरों को वीरता के लिए नौसेना मेडल मिले, जिन्होंने जोखिम भरी निगरानी में दुश्मन पर नजर रखी।
पाकिस्तानी गश्ती विमान और एएसडब्ल्यू के बावजूद एक भी भारतीय पनडुब्बी नहीं पकड़ी गई। विक्रांत समूह में 36 से ज्यादा युद्धपोत, डेस्ट्रॉयर, फ्रिगेट तैनात थे। पाक के सी-ईगल विमान को मिग-29के ने खदेड़ दिया।
पहलगाम हमले के बाद तीनों सेनाओं ने दबाव बढ़ाया। विक्रांत पर बराक-8 मिसाइलें, राफेल आने वाले हैं। पी-8आई की नजर में दुश्मन फंस गया। यह तैनाती भारत की नौसेना शक्ति का प्रतीक बनी।
