
नई दिल्ली, 28 जनवरी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद के बजट सत्र से पूर्व राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण को महज रस्मअदायगी नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए दिशा-निर्देशक महत्वपूर्ण संदेश करार दिया है।
एक्स प्लेटफॉर्म पर अपनी पोस्ट में बिरला ने कहा कि सुबह 11 बजे दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति का संबोधन सत्र का आगाज करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा, ‘यह अभिभाषण परंपरा मात्र नहीं है। यह देशवासियों को मार्गदर्शन देने वाला प्रमुख संदेश है, जिसमें भावी नीतियां, फैसले और योजनाएं स्पष्ट होती हैं। यह आने वाले वर्ष की विकास गाथा का सार है।’
बिरला ने इसे लोकतंत्र की सच्ची भावना बताया, जहां जनभावनाएं नीति निर्माण का आधार बनती हैं और संसद उनका अमल करती है। उन्होंने एक वीडियो साझा किया, जिसमें केंद्रीय बजट का ऐतिहासिक सफर बयां किया गया।
आजादी के बाद 1947-48 का पहला बजट मात्र 197 करोड़ का था, जब अर्थव्यवस्था 2.78 लाख करोड़ के करीब थी। फोकस भोजन सुरक्षा, शासन और आधारभूत सुविधाओं पर रहा। 1960-70 के दशक में हरित क्रांति ने ग्रामीण और सार्वजनिक निवेश बढ़ाकर अनाज आत्मनिर्भरता दिलाई।
1991 के सुधारों ने दिशा बदली। 1991-92 में 1 लाख करोड़ बजट और 270 अरब डॉलर जीडीपी से शुरुआत हुई। 2000-01 में 3-4 लाख करोड़ खर्च, 468 अरब डॉलर जीडीपी। 2010-11 में 10-12 लाख करोड़ बजट, 1.67 ट्रिलियन डॉलर जीडीपी। 2020-21 में महामारी के बावजूद 35 लाख करोड़ बजट, 2.67 ट्रिलियन जीडीपी।
आज बजट 50 लाख करोड़ पार कर चुका, अर्थव्यवस्था 4 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर। 1947 से 25 हजार गुना वृद्धि! अब केंद्र में इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेसवे, रेल, हवाई अड्डे, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप, रक्षा, हरित ऊर्जा, एआई, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, विनिर्माण और आत्मनिर्भर भारत हैं।
बिरला के बयान से साफ है कि यह अभिभाषण विकास की नई ऊंचाइयों का आधार बनेगा।