
मौसम बदलते ही सर्दी-जुकाम, बुखार जैसी मौसमी बीमारियां शरीर पर हमला बोल देती हैं। ऐसे में तेल स्नान एक प्राचीन और प्रभावी उपाय साबित हो सकता है। सिद्ध चिकित्सा पद्धति, जो दक्षिण भारत की पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणाली है, में तेल स्नान को 11 प्रमुख उपचारों में शुमार किया गया है। यह न केवल शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है, बल्कि त्वचा, आंखें और अन्य संवेदी अंगों को भी स्वस्थ रखता है।
आयुष मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, हर चार दिन में एक बार तेल स्नान करने से समग्र स्वास्थ्य में जबरदस्त सुधार होता है। यह सरल घरेलू नुस्खा रोजमर्रा की जिंदगी में आसानी से अपनाया जा सकता है। तेल स्नान के फायदे मौसमी बदलाव के दौरान खासतौर पर उपयोगी हैं, क्योंकि यह मांसपेशियों और नसों को मजबूती प्रदान करता है तथा मोटर फंक्शन को बेहतर बनाता है।
तेल स्नान कैसे करें? सबसे पहले तिल का तेल या शुद्ध देसी घी लेकर पूरे शरीर और सिर की स्कैल्प पर अच्छी तरह मालिश करें। तेल को 30-45 मिनट तक त्वचा में समाहित होने दें। फिर पंचकर्पम नामक हर्बल बाथ पाउडर से स्नान करें। यह प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से बना पाउडर त्वचा को गहराई से साफ करता है और ताजगी प्रदान करता है।
नियमित तेल स्नान से इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होता है, जिससे वायरल संक्रमण और सांस संबंधी समस्याओं से बचाव मिलता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि आधुनिक व्यस्त जीवन में भी इस प्राचीन विधि को अपनाएं, लेकिन शुरू करने से पहले किसी वैद्य से परामर्श अवश्य लें। तेल स्नान स्वास्थ्य लाभ के साथ-साथ तनाव कम करने में भी सहायक है।