
भुवनेश्वर। मलकानगिरी जिले में पिछले महीने हुई जातीय हिंसा के बाद ओडिशा सरकार ने आदिवासी समुदाय की शिकायतों को दूर करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक में ये फैसले लिए गए।
मुख्यमंत्री कार्यालय के बयान के अनुसार, जिला कलेक्टर सोमेश कुमार उपाध्याय हर पखवाड़े रेगुलेशन 2/56 के तहत लंबित सैकड़ों मामलों की समीक्षा करेंगे। प्रगति की रिपोर्ट दक्षिणी राजस्व संभागीय आयुक्त और राज्य सरकार को दी जाएगी।
राज्य सरकार ने भूमिहीन और बेघर आदिवासी परिवारों को स्थायी भूमि पट्टे प्रदान करने का निर्णय लिया है। वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) और ओडिशा सरकारी भूमि बंदोबस्त अधिनियम (ओजीएलएस) के तहत जल्द पट्टे दिए जाएंगे। जिला कलेक्टर मासिक समीक्षा कर सरकार को सूचित करेंगे।
मच्छकुंड सिंचाई परियोजना से विस्थापित परिवारों को भी स्थायी पट्टे मिलेंगे। राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव देवरंजन कुमार सिंह जिले के सभी राजस्व मामलों की तिमाही समीक्षा करेंगे।
जल संसाधन विभाग जल निकायों के पास आदिवासी समुदायों की ऊपरी कृषि भूमि पर सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। साथ ही, आदिवासी आवेदकों को मुख्यमंत्री कृषि विकास योजना, पीएमईजीपी और पीएमएफएमई योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जाएगा।
शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़े कदम उठाए गए। प्राथमिक स्कूलों में कोया, दिदायी और बोंडा भाषाओं के बहुभाषी शिक्षक पद शीघ्र भरे जाएंगे। मलकानगिरी के उच्च माध्यमिक विद्यालयों में अधिक सीटें जोड़ी जाएंगी, ताकि आदिवासी छात्र कक्षा 10 के बाद पढ़ाई जारी रख सकें।
ये फैसले मलकानगिरी के आदिवासियों के विकास और कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे। ओडिशा सरकार की यह पहल जातीय हिंसा के बाद शांति और समृद्धि बहाल करने की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है।