
जौनपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ने महिलाओं की जिंदगी बदल दी है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 150 से 300 महिलाएं 15 से अधिक समूहों में गाय के गोबर से दीपक, गमले और सजावटी सामान तैयार कर रही हैं। अब एक निर्यातक कंपनी ने उनके उत्पादों को खरीदने का समझौता कर लिया है, जिससे ये सामान दुबई तक पहुंचेंगे।
महिलाओं को प्रति दीपक कम से कम चार रुपये का भुगतान मिलेगा और कंपनी घर से ही सामान ले लेगी। वर्तमान में प्रतिदिन पांच क्विंटल गोबर से दीपक बन रहे हैं, लेकिन मांग बढ़ने से अब सात क्विंटल की जरूरत है। इससे हर महिला की मासिक आय 6,000 रुपये तक पहुंच सकती है।
स्वरोजगार उपायुक्त जितेंद्र कुमार ने बताया कि एनआरएलएम का लक्ष्य इन्हीं ‘दीदियों’ को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। कंपनी के साथ समझौते से उत्पादों की नियमित बिक्री सुनिश्चित होगी और स्थायी आय के स्रोत बनेंगे।
समूह की सुनिधि ने कहा कि 2020 में 10 महिलाओं के साथ उन्होंने समूह बनाया। सरकार से 1.10 लाख की सहायता मिली, जिससे काम शुरू हुआ। प्रतिदिन 10 रुपये बचत से तीन लाख की पूंजी जमा हुई। अब 15 टीमें गोबर उत्पाद बना रही हैं।
देवी समूह की ऊषा बोलीं कि पहले केवल घर का काम था, अब आत्मनिर्भर हैं। 1.25 लाख सहायता से दीपक निर्माण शुरू किया। अब मासिक 6,000 रुपये की आय की उम्मीद है। यह मॉडल ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा है।