
नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की डूबने से मौत ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) मंगलवार को नोएडा पहुंचा और मामले की तह तक जाने का काम शुरू कर दिया। पांच दिनों में रिपोर्ट देने का अल्टीमेटम है, जिसमें लापरवाही के गंभीर आरोपों पर रोशनी डाली जाएगी।
एडीजी मेरठ जोन भानू भास्कर के नेतृत्व में टीम दोपहर सवा बारह बजे नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पहुंची। बोर्ड रूम में तीन घंटे चली बैठक में पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह, डीएम मेधा रूपम और एसीईओ कृष्णा करुणेश से सवालों की बौछार की गई। विभिन्न विभागों के अधिकारी फाइलें लिये बाहर खड़े रहे, जिन्हें बारी-बारी बुलाया गया।
मृतक के पिता राजकुमार मेहता को भी आधा घंटा बुलाकर बयान लिया गया। उन्होंने बताया कि उन्होंने आंखों देखा कि बेटे की कार पानी में डूबी, जबकि 80 कर्मचारी मौजूद थे लेकिन किसी ने बचाने की कोशिश नहीं की। उनका पूरा ब्यौरा जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा। बयान के बाद उन्हें सुरक्षित घर भेजा गया।
बैठक के बाद टीम हादसे वाली जगह पर पहुंची। बिना सुरक्षा उपाय वाले मोड़, पानी भराव स्थल, सड़कें और बिल्डर के कागजातों का मुआयना किया। भास्कर ने बताया कि जांच तीन चरणों में होगी, दो पूरे हो चुके। तीसरे में गवाहों के बयान लेंगे। सभी स्तरों पर दोषियों पर कार्रवाई होगी।
सीएम ने पहले ही सीईओ लोकेश एम को हटाया और जूनियर इंजीनियर की नौकरी गई। सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट के बाद और कार्रवाइयां होंगी। यह हादसा नोएडा की बुनियादी सुविधाओं की पोल खोलता है, जहां सुरक्षा की अनदेखी जानलेवा साबित हो रही है।