
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाते हुए आम लोगों को अधिकारियों से मिलने का रास्ता आसान कर दिया है। उनके सख्त निर्देशों के बाद अब कोई भी नागरिक बिना किसी बाधा के जिला मजिस्ट्रेट, एसपी या अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मिल सकेंगे।
पटना में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में कुमार ने स्पष्ट कहा कि प्रशासन जनता का सेवक है, राजा नहीं। प्रत्येक अधिकारी को प्रतिदिन निश्चित समय सार्वजनिक दरबार लगाना अनिवार्य होगा। ब्लॉक स्तर पर भी जनता दरबार आयोजित होंगे।
इस निर्णय का उद्देश्य लंबे समय से चली आ रही शिकायतों का समाधान करना है, जहां लोग अपॉइंटमेंट के नाम पर ठुकरा दिए जाते थे। अब उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर निलंबन तक की कार्रवाई होगी।
जिले जैसे मुजफ्फरपुर और भागलपुर में पहले ही लोग बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। एक किसान ने बताया, ‘पहले रिश्वत दिए बिना डीएम से मिलना असंभव था, अब सब कुछ बदल गया।’
नीतीश कुमार का सुशासन अभियान हमेशा से जन-केंद्रित रहा है। यह कदम उस दिशा में महत्वपूर्ण है। हालांकि, कार्यान्वयन पर नजर रखना जरूरी होगा ताकि यह कागजी कार्रवाई न बन जाए।
चुनावी माहौल में यह फैसला कुमार की छवि को मजबूत करेगा। बिहार के 12 करोड़ लोगों के लिए प्रशासनिक पहुंच आसान होना वाकई क्रांतिकारी कदम है। आने वाले दिनों में इसके परिणाम सामने आएंगे।