
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में सपा विधायकों के हंगामे और कागज छीनने की घटना पर मत्स्य मंत्री व निषाद पार्टी अध्यक्ष संजय निषाद ने अखिलेश यादव पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा, ‘अपनों ने लूटा, गैरों में दम कहां, किश्ती वहीं डूबी जहां पानी कम था।’
आईएएनएस से विशेष बातचीत में निषाद ने सपा के 30 साल के शासन को लूट का पर्याय बताया। सच्चर कमेटी ने इनका असली चेहरा उजागर कर दिया। ये पीछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक (पीडीए) का ढोंग करते हैं, लेकिन पीड़ा, दुख और अपमान ही बांटते हैं। हमारी आवाज दबाते हैं। निषाद समाज के लिए 30 साल में एक रुपया खर्च किया हो तो दिखाएं। दिल्ली से आने वाले पैसे भी हजम कर लिए। बंदूक के जोर पर धन लूटा जाता था, जनता को सच्चाई बतानी पड़ेगी।
निषाद ने कहा कि हमारे नेताओं की हत्या सपा काल में हुई, लेकिन सीबीआई जांच क्यों नहीं? आजम खां की भैंस ढूंढी जा सकती है तो हमारे नेताओं के कातिल क्यों नहीं? सामाजिक न्याय रिपोर्ट में मिल्कमैन को 27, लेदरमैन को 23 प्रतिशत, बाकी कहां? ये मछुआरों को निगलने वाले मगरमच्छ हैं। राष्ट्रपति अधिसूचना में मेरा नाम एससी में है, फिर 1994 में ओबीसी में डालने की क्या जरूरत?
फिल्मों के विवादित नामों पर निषाद ने चालाकी का पर्दाफाश किया। विवाद पैदा कर प्रचार करेंगे फिर नाम बदल देंगे। जाति-धर्म आधारित नामों पर रोक के लिए कानून जरूरी। अरशद मदनी के बयान पर कहा कि इन ठेकेदारों ने मुसलमानों को जाहिल बना दिया। वे हमारे भाई हैं लेकिन बेईमानों से बर्बाद। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद संत हैं, राजनीति छोड़ धर्म प्रचार करें।
निषाद का यह आक्रोश यूपी की राजनीति में नई लकीर खींच रहा है, जहां वंचितों की आवाज तेज हो रही है।