
कोलकाता की एनआईए विशेष अदालत ने पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा के भर्ती और कट्टरकरण षड्यंत्र में कर्नाटक के सैयद एम इदरीस को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। पश्चिम बंगाल में मुस्लिम युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए जिहाद के लिए उकसाने का यह मामला देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा था।
अदालत ने आईपीसी व यूएपीए की धाराओं में दोषी ठहराते हुए 70 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। यह फैसला आतंकी नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
एनआईए ने अप्रैल 2020 में केस अपने हाथ लिया। जांच में इदरीस व जम्मू-कश्मीर के अल्ताफ अहमद राथर की संलिप्तता उजागर हुई। तानिया परवीन को पहले एसटीएफ ने बदुरिया से गिरफ्तार किया था, जहां जिहादी साहित्य बरामद हुआ।
नेटवर्क का पाक लश्कर से सीधा संबंध पाया गया। चार्जशीट में फरार आयशा व बिलाल भी नामजद। अन्य आरोपियों पर मुकदमा जारी है। एनआईए ऐसी गतिविधियों पर कड़ा रुख अपनाए रखेगी।