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फर्जी नोट कांड: एनआईए कोर्ट ने 7 दोषियों को 7-10 साल की सजा सुनाई

विशाखापत्तनम की एनआईए विशेष अदालत ने 2015 के बड़े फर्जी भारतीय मुद्रा नोट मामले में सात आरोपियों को सजा सुनाकर देश की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। गैरकानूनी...

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Lok Shaktiसंवाददाता (Reporter)
|भारत|
March 2, 2026
फर्जी नोट कांड: एनआईए कोर्ट ने 7 दोषियों को 7-10 साल की सजा सुनाई
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विशाखापत्तनम की एनआईए विशेष अदालत ने 2015 के बड़े फर्जी भारतीय मुद्रा नोट मामले में सात आरोपियों को सजा सुनाकर देश की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून की धाराओं के तहत 7 से 10 वर्ष की कठोर कारावास और जुर्माने की सजाएं सुनाई गईं। यह फैसला भारत-बांग्लादेश सीमा से उच्च गुणवत्ता वाले नकली नोटों की तस्करी करने वाले गिरोह पर करारा प्रहार है।

दोषी असम, पश्चिम बंगाल व कर्नाटक के निवासी सद्दाम हुसैन (बरपेटा), रोस्तम (मालदा), अमीरुल हक (बरपेटा), मोहम्मद हकीम शेख (मालदा), सद्दाम हुसैन (बेंगलुरु), सैयद इमरान (मांड्या) व मोहम्मद अकबर अली (कामरूप) हैं। जांच में सामने आया कि यह गिरोह नकली नोटों को देशभर में फैलाने की साजिश रच रहा था, जिसका मकसद अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाना था।

बरपेटा के सद्दाम हुसैन को धारा 16 में 10 वर्ष कारावास व 5 हजार जुर्माना। उन्हें विशाखापत्तनम रेलवे स्टेशन पर डीआरआई ने 5.015 लाख के फर्जी नोटों संग पकड़ा था। अमीरुल हक को धारा 18 में 10 वर्ष व जुर्माना (न चुकाने पर 1 वर्ष अतिरिक्त)। रोस्तम व बेंगलुरु सद्दाम को धारा 20 में 7 वर्ष व 2 हजार जुर्माना (डिफॉल्ट पर 8 माह अतिरिक्त)। हकीम शेख को 8 वर्ष व 5 हजार जुर्माना। इमरान व अकबर अली को भी 7 वर्ष की सजा। इमरान पूर्व में भी दोषी रहे हैं।

डीआरआई की शुरुआती कार्रवाई के बाद एनआईए ने 2015 में जांच संभाली। 2016 से 2019 तक चार्जशीटें दाखिल हुईं। यह सजा नकली मुद्रा के जरिए आर्थिक तोड़फोड़ करने वालों के लिए कड़ी चेतावनी है।

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