
नई दिल्ली। ओडिशा के प्रवासी मजदूर के. सूरज पर तमिलनाडु के तिरुत्तणी में हुए क्रूर हमले के मामले ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) को सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है। आयोग ने राज्य सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पुलिस की देरी और पीड़ित के गायब होने पर गहरी नाराजगी जताई है।
दिसंबर 2025 में तिरुत्तणी रेलवे स्टेशन के निकट चार नशेड़ी किशोरों ने सूरज पर हंसिया से हमला बोला। गंभीर रूप से जख्मी सूरज को अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां 27 दिसंबर को उसका बयान दर्ज हुआ। फिर भी एफआईआर 28 दिसंबर को दर्ज हुई, वो भी सोशल मीडिया के दबाव में।
सबसे चिंताजनक यह कि सूरज इलाज के दौरान अस्पताल से लापता हो गया। राज्य सरकार का जवाब है कि उसके पास कोई जानकारी नहीं। एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो ने इसे सरकारी लापरवाही की हद बताया और सोशल मीडिया पर तीखा प्रहार किया।
आयोग ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि सूरज को तलाशा जाए, उसका इलाज सुनिश्चित हो, 2 लाख मुआवजे पर स्पष्टीकरण दिया जाए और जिम्मेदारों पर कार्रवाई का ब्योरा सौंपा जाए। यह केवल अपराध नहीं, बल्कि मानवाधिकार हनन का गंभीर मामला है। आयोग ने चेतावनी दी है कि जवाब न मिलने पर कड़ी कार्रवाई होगी।
प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्यों की जिम्मेदारी है। यह घटना पूरे देश के लिए警钟 है।