
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने कोलकाता के आनंदपुर स्थित ‘वाओ! मोमो’ गोदाम-फैक्ट्री में 26 जनवरी को लगी भयानक आग पर कड़ा रुख अपनाया है। इस हादसे में कम से कम 20 मजदूरों की जान चली गई और कई अभी भी लापता हैं। आयोग ने मामले को मानवाधिकार हनन का प्रारंभिक उल्लंघन मानते हुए कोलकाता के जिलाधिकारी को नोटिस जारी किया है।
तीन दिनों के अंदर एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) सौंपने के आदेश दिए गए हैं, जिसमें ईमेल के जरिए भी प्रति भेजनी होगी। 1993 के मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम की धारा 12 के तहत यह निर्देश जारी हुआ है। शिकायत में प्रबंधन पर आपराधिक लापरवाही, फायर सर्विसेज, श्रम विभाग और स्थानीय प्रशासन की नाकामी के आरोप लगाए गए हैं।
मजदूरों के सोते समय आग लगने से बचाव के पर्याप्त इंतजाम न होने की बात सामने आई है। फैक्ट्री एक्ट 1948, 2020 की व्यावसायिक सुरक्षा संहिता, आपदा प्रबंधन कानून और संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देकर स्वतंत्र जांच, जिम्मेदारों पर कार्रवाई, पीड़ित परिवारों को मुआवजा व पुनर्वास तथा राज्यव्यापी सुरक्षा ऑडिट की मांग की गई है।
प्रियंक कानूनगो की अगुवाई वाली पीठ ने आरोपों की गहन जांच का आदेश दिया है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। यह घटना खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में सुरक्षा मानकों की पोल खोलती है, जो श्रमिकों की जिंदगियों को दांव पर लगा रही है। आयोग का यह कदम उद्योगपतियों और अधिकारियों को सतर्क करने वाला है।