
राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में जल संरक्षण को मजबूत बनाने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भोपाल की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ ने कोट्री तहसील के प्रमुख जल निकायों से अवैध कब्जे हटाने के लिए जिला कलेक्टर को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया। यह फैसला विष्णु कुमार वैष्णव की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुनाया गया, जिसमें क्षेत्र के तालाबों पर बड़े स्तर पर अतिक्रमण और पर्यावरणीय क्षति का खुलासा हुआ।
न्यायिक सदस्य जस्टिस शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य ईश्वर सिंह की बेंच ने संयुक्त समिति की रिपोर्ट तथा तहसीलदार के आधिकारिक दस्तावेजों का गहन अध्ययन किया। इनमें धर्मो तालाब और फतेह सागर (बाबा तालाब) जैसे अधिसूचित जलाशयों पर कब्जों की पुष्टि हुई। याचिकाकर्ता ने बताया कि ये तालाब भूजल पुनर्भरण और स्थानीय पारिस्थिकी तंत्र के लिए जीवनरेखा हैं, जिनकी उपेक्षा से लंबे समय तक जल संकट गहरा सकता है।
राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने सूचित किया कि राजस्व एवं पर्यावरण कानूनों के अनुरूप कार्रवाई प्रारंभ हो चुकी है। सरकार ने संरक्षित जल निकायों पर अतिक्रमण की गंभीरता स्वीकार करते हुए कानूनी उपायों का भरोसा दिलाया।
एनजीटी ने जल निकायों के संरक्षण को पर्यावरणीय प्राथमिकता बताते हुए जिला प्रशासन को बिना विलंब सभी आवश्यक कदम उठाने को कहा। प्रभावित पक्षों को दो सप्ताह में पक्षकार बनने की छूट दी गई है, बशर्ते वे पूर्व प्रतियां सौंपें।
अगली सुनवाई 25 फरवरी 2026 को निर्धारित है, जब अनुपालन की प्रगति की समीक्षा होगी। यह आदेश राजस्थान में जल संसाधनों की रक्षा के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।