
बेंगलुरु। नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन विमेन (एनएफआईडब्ल्यू) की कर्नाटक इकाई ने राज्य सरकार से पूर्व देवदासियों के दोबारा सर्वे को पूर्ण, निष्पक्ष और सटीक ढंग से पूरा करने की जोरदार मांग की है। यह प्रथा सदियों से दलित महिलाओं का शोषण करती रही है।
देवदासी व्यवस्था के तहत मंदिरों को समर्पित लड़कियों का जीवन शोषण का शिकार बन गया। कानूनी रूप से प्रतिबंधित होने के बावजूद यह कुछ क्षेत्रों में विद्यमान है। प्रदेश अध्यक्ष ज्योति ए. ने बताया कि महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर द्वारा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को सौंपी रिपोर्ट में केवल 23,395 महिलाओं की पहचान हुई, जबकि 2007-08 के सर्वे में 46,660 थीं।
ज्योति ने सवाल उठाया कि बिना राज्य स्तरीय निगरानी या पुनर्मूल्यांकन समिति की बैठक के यह सर्वे कैसे विश्वसनीय? कार्यकर्ताओं के अनुसार कई जिले हजारों मामले लंबित हैं, स्थानीय स्तर पर बैठकें अनियमित, जागरूकता अभाव और दस्तावेजी बाधाएं हैं।
महासचिव क. रेणुका ने कहा कि प्रथा पूरी तरह समाप्त नहीं हुई, इसलिए उम्र सीमा नहीं होनी चाहिए। समिति सदस्य शेकम्मा ने गड़बड़ी का आरोप लगाया- गैर देवदासियों को शामिल कर असली पीड़ितों को बाहर। एनएफआईडब्ल्यू ने जांच और न्याय की मांग की, अधूरी रिपोर्ट पर योजनाएं न चलाने को कहा।
यह मुद्दा शोषित महिलाओं के पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार को पारदर्शी प्रयास करने होंगे।