
नई दिल्ली में आयोजित स्टडी इन इंडिया एजु-डिप्लोमैटिक कॉन्क्लेव 2026 में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 के लागू होने से देश की शिक्षा प्रणाली पूरी तरह बदल चुकी है। 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में शिक्षा सबसे मजबूत सशस्त्र है।
भारत की सबसे बड़ी पूंजी उसकी युवा शक्ति है, जो नई सोच और तकनीकों से देश को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है। सुषमा स्वराज भवन में 50 से अधिक देशों के राजनयिकों को संबोधित करते हुए प्रधान ने वैश्विक विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस खोलने का न्योता दिया। यूजीसी ने पारदर्शी और त्वरित नियम बनाए हैं, जिससे यह प्रक्रिया आसान हो गई है।
इससे भारतीय छात्रों को विदेश जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे घर बैठे अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता की शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे। मंत्री ने विदेशी संस्थानों से भारत की नवाचार प्रधान शिक्षा व्यवस्था के साथ साझेदारी का आह्वान किया। भारत अब वैश्विक शिक्षा का केंद्र बनने की राह पर है, जहां विदेशी छात्र भी पढ़ाई, शोध और सहयोग के लिए आएंगे।
नीति 2020 ने छात्रों को एक विषय की सीमा से मुक्त कर दिया है। वे बहु-विषयी अध्ययन कर सकते हैं। कौशल विकास पर बल दिया जा रहा है, ताकि शिक्षा रोजगार से सीधे जुड़े। डिग्री के साथ कार्यकुशलता भी मिले।
ऑस्ट्रेलिया, इटली, ब्रिटेन और अमेरिका के प्रमुख संस्थानों के आवेदनों को एक माह में मंजूरी मिल चुकी है। सम्मेलन में भारतीय ज्ञान परंपरा का वैश्वीकरण, एआई का शिक्षा में उपयोग, कौशल को वैश्विक स्तर से जोड़ना और भारत इनोवेशन 2026 जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
दुनिया में अनिश्चितताओं के बावजूद शिक्षा देशों को जोड़ती है। ज्ञान आदान-प्रदान से सच्ची साझेदारी बनती है। प्रधान ने सभी से अपने छात्रों को भारत से जोड़ने को कहा। यह आयोजन भारत के वैश्विक शिक्षा नेतृत्व का संकेत है। आइए, यहां पढ़ें, शोध करें और मिलकर प्रगति करें।