
प्रख्यात उद्योगपति और सांस्कृतिक प्रेमी संजय सरावगी ने एनडीए सरकार की शिक्षा नीतियों की भूरी-भूरी प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि सरकार सनातन संस्कृति को शिक्षा के साथ जोड़कर अनुपम कार्य कर रही है, जो देश के युवाओं के लिए वरदान सिद्ध हो रहा है।
हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में सरावगी ने विस्तार से बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत वेद, उपनिषद और योग जैसी प्राचीन विद्वता को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। इससे छात्र न केवल आधुनिक विज्ञान सीख रहे हैं, बल्कि नैतिक मूल्यों से भी परिपक्व हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में इन योजनाओं से ग्रामीण विद्यालयों में नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
सरावगी ने कहा, ‘यह केवल किताबी सुधार नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनरुत्थान है।’ उन्होंने शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का जिक्र किया, जहां सनातन दर्शन पर आधारित मॉड्यूल जोड़े गए हैं। आंकड़ों के अनुसार, इन बदलावों से छात्रों की एकाग्रता और अनुशासन में 18 प्रतिशत की सुधार दर्ज किया गया है।
आलोचकों के संदेह को खारिज करते हुए सरावगी ने जोर दिया कि सनातन संस्कृति वैज्ञानिक चेतना की जननी है। सरकार के डिजिटल प्लेटफॉर्म, जो संस्कृत ग्रंथों को ऑनलाइन उपलब्ध कराते हैं, इसकी मिसाल हैं।
अंत में, सरावगी ने अपील की कि इस दिशा में और निवेश हो। एनडीए सरकार का यह मॉडल भारत को ज्ञान आधारित महाशक्ति बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।