
नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को अल्केमिस्ट ग्रुप के मामले में अपार सफलता हाथ लगी है। राष्ट्रीय कंपनी कानून ट्रिब्यूनल (एनसीटीएल) ने 3 फरवरी को अल्केमिस्ट लिमिटेड के खिलाफ चल रही कॉर्पोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) को समाप्त घोषित कर दिया। ट्रिब्यूनल ने इसे धोखाधड़ीपूर्ण और षड्यंत्रपूर्ण पाया।
अल्केमिस्ट समूह की कंपनियों ने निवेशकों से प्लॉट, विला और ऊंची कमाई के वादे पर 1840 करोड़ रुपये से अधिक वसूले, लेकिन न संपत्ति मिली न पैसा लौटा। यह धनराशि अन्य ग्रुप कंपनियों से अल्केमिस्ट लिमिटेड में अंतर-कॉर्पोरेट जमा के रूप में स्थानांतरित कर दी गई। ईडी ने 2021 से 2025 तक कई अभियोजन शिकायतें दर्ज कीं और 492.72 करोड़ की संपत्तियां जब्त कीं।
साई टेक मेडिकेयर ने आईबीसी की धारा 9 के तहत सीआईआरपी शुरू की, लेकिन लेनदारों की समिति में ग्रुप की ही कंपनियां हावी रहीं। टेक्नोलॉजी पार्क्स लिमिटेड के पास 97 प्रतिशत वोटिंग शक्ति थी, जबकि अन्य आरोपी कंपनियां भी शामिल थीं। ईडी ने साबित किया कि यह प्रक्रिया जब्त संपत्तियों को मुक्त करने और धारा 32ए की छूट हासिल करने की चाल थी। पूर्व कर्मचारी गौरव मिश्रा को रेजोल्यूशन प्रोफेशनल बनाना निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है।
एनसीएलटी ने ईडी के तर्कों को स्वीकार किया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि आईबीसी वास्तविक दिवालिया के लिए है, न कि अपराधी कमाई सफेद करने या पीएमएलए रोकने के लिए। धारा 65 के तहत प्रक्रिया रद्द कर दी गई, धारा 14 की रोक हटा ली गई, आरपी की नियुक्ति समाप्त की गई और साई टेक पर 5 लाख का जुर्माना ठोंका।
यह फैसला आईबीसी और पीएमएलए के समानांतर संचालन को मजबूत करता है। निवेशकों के हित सुरक्षित होंगे और वित्तीय अपराधों पर अंकुश लगेगा।