
भारतीय नौसेना के प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने म्यांमार की महत्वपूर्ण यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की। इस दौरान उन्होंने म्यांमार नौसेना प्रमुख से भेंट की और नेवल ट्रेनिंग कमांड में अधिकारियों व प्रशिक्षुओं को संबोधित किया।
अपने व्याख्यान में उन्होंने ‘समुद्री क्षेत्र की उभरती चुनौतियां एवं भावी युद्ध’ विषय पर गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया। बंगाल की खाड़ी में साझा खतरे गिनाते हुए नौसेना प्रमुख ने दोनों देशों के बीच नौसैनिक सहयोग बढ़ाने पर बल दिया। भारत सरकार के ‘महासागरमाला’ दृष्टिकोण के अनुरूप दोनों नौसेनाओं में समन्वय को अपरिहार्य बताया।
चालीस वर्षों के अनुभव से प्रेरित होकर उन्होंने युवा अधिकारियों को नेतृत्व के सूत्र सिखाए। बदलते परिवेश में चुनौतियों का पूर्वानुमान, त्वरित अनुकूलन एवं जटिल परिस्थितियों का कुशल प्रबंधन ही श्रेष्ठ नेतृत्व की कसौटी है। स्पष्ट चिंतन एवं दृढ़ संकल्प को नेतृत्व के आधार स्तंभ कहा।
निरंतर शिक्षण एवं मानवीय नेतृत्व पर जोर देते हुए कहा कि तकनीक साधन मात्र है, वास्तविक परिवर्तन सैनिकों के पराक्रम से होता है। यह यात्रा भारत-म्यांमार समुद्री साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है।
इधर, प्रयागराज में आयोजित सेना सिम्पोजियम ‘रक्षा त्रिवेणी संगम’ में लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने रक्षा आत्मनिर्भरता को गति देने पर चर्चा की। उपयोगकर्ता, उद्योग एवं शिक्षा को जोड़ते हुए दो फ्रंटलाइन कमांडों ने परिचालन अनुभव साझा किए, जो सैनिकों के लिए तकनीकी समाधान लाएंगे।
