
नई दिल्ली, 28 फरवरी। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर पूरा देश महान वैज्ञानिक सीवी रमन को याद करता है, जिनकी रमन प्रभाव खोज ने भौतिकी को नई दिशा दी। 1928 में इस खोज की घोषणा के सम्मान में 1986 से 28 फरवरी को यह दिन मनाया जाता है।
तिरुचिरापल्ली में 1888 में जन्मे रमन समुद्र के नीले रंग और आकाश की नीली आभा के रहस्यों से जूझे। संसाधनों की कमी ने रास्ता रोका, लेकिन 1907 में कोलकाता में वित्त विभाग की सरकारी नौकरी ने उन्हें संभाला। 1917 में उन्होंने नौकरी छोड़ कलकत्ता विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बने और आईएसीएस में शोध शुरू किया।
स्पेक्ट्रोमीटर के लिए जरूरी 22,000 रुपये न होने पर उन्होंने जीडी बिड़ला को पत्र लिखा- ‘यह उपकरण आयातित करवाइए, मैं नोबेल दिला दूंगा।’ बिड़ला ने विश्वास जताया। ठीक एक साल बाद रमन ने प्रकाश के प्रकीर्णन में रंग-ऊर्जा परिवर्तन सिद्ध कर ‘रमन प्रभाव’ नाम दिया।
1930 में एशिया के पहले नोबेल विजेता बने। प्राचीन भारत की वैज्ञानिक विरासत को नया आयाम मिला। आज स्कूलों में प्रदर्शन, सेमिनार और युवा शोध प्रोत्साहन हो रहे हैं। रमन की कहानी साबित करती है कि दृढ़ इच्छा से असंभव संभव होता है।