
नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी नर्मदा मां की जयंती पर रविवार को घाटों पर भक्तों का अपार जनसैलाब उमड़ पड़ा। नर्मदा नदी जो न सिर्फ इस क्षेत्र की धरती को हराभरा बनाती है बल्कि लाखों लोगों की आस्था का केंद्र भी है, उसकी अवतरण तिथि पर श्रद्धालुओं ने पदयात्रा और शोभायात्राओं के साथ उपस्थिति दर्ज कराई। सतधारा सहित सभी प्रमुख घाटों पर भक्ति का अनोखा संगम देखने को मिला।
गणतंत्र दिवस के अवसर पर स्कूली बच्चों ने तिरंगे की चूनरें अर्पित कर देशभक्ति और श्रद्धा का अनूठा मेल दर्शाया। यह पर्व केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का मजबूत संदेश भी दिया। भक्तों ने संकल्प लिया कि मां नर्मदा के पावन जल और घाटों को हमेशा निर्मल रखेंगे।
दूर-दूर से पैदल आए श्रद्धालुओं में सिवनी जिले के आदेगांव निवासी गोलू कुशवाहा प्रमुख थे। 2017 से हर वर्ष इस यात्रा पर आने वाले गोलू ने कहा कि मां की कृपा अपार है। इस बार तो गांव के रास्ते सूने पड़ गए। उन्होंने भविष्य में भी इसी भक्ति भाव से आने का वचन दिया।
स्वच्छता अभियान की मेंटर शिवानी विश्वकर्मा ने बताया कि भक्त अक्सर पाउच, बोतलें या पॉलीथिन छोड़ जाते हैं। जागरूकता से लोगों को समझाया जा रहा है कि आस्था के साथ स्वच्छता अनिवार्य है। भगवान उपाध्याय ने श्लोकों से प्रेरित कर कहा कि असली पुण्य तो मां के आंचल को पवित्र रखने में है।
सभी से अपील की गई कि घाट पर कोई कचरा न छोड़ें। इस संकल्प से नदी का पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और हमारी भक्ति और गहरी होगी। नर्मदा जयंती ने सिद्ध कर दिया कि सच्ची श्रद्धा प्रकृति रक्षा से जुड़ी होती है।