
22 जनवरी को नम्रता शिरोडकर अपना 54वां जन्मदिन मना रही हैं। 90 के दशक की चहेती अभिनेत्री ने कम उम्र में ही फिल्मों में कदम रखा और कई यादगार रोल निभाए। लेकिन शादी के बाद उन्होंने करियर को साइडलाइन कर लिया। आइए जानें उनकी प्रेरणादायक कहानी।
महाराष्ट्रीयन परिवार में जन्मीं नम्रता को एक्टिंग का जुनून दादी मीनाक्षी शिरोडकर से मिला। मराठी सिनेमा की दिग्गज मीनाक्षी ने अपने जमाने में बिकिनी पहनकर सनसनी फैलाई थी। इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए नम्रता और उनकी बहन शिल्पा ने बॉलीवुड में एंट्री की।
बचपन में 1977 की फिल्म ‘शिरडी के साईं बाबा’ से डेब्यू करने वाली नम्रता ने पढ़ाई के बाद मॉडलिंग में हाथ आजमाया। 1993 में फेमिना मिस इंडिया का ताज पहनकर वे मिस यूनिवर्स में छठे स्थान पर रहीं। इससे बॉलीवुड के दरवाजे खुल गए।
1998 में ‘जब प्यार किसी से होता है’ से मुख्य भूमिका मिली, लेकिन ‘वास्तव’ ने उन्हें घर-घर पहचान दी। संजय दत्त के साथ यह फिल्म अंडरवर्ल्ड की कठोर सच्चाई दिखाती है, जो सुपरहिट रही।
फिर आईं ‘पुकार’, ‘अस्तित्व’, ‘कच्चे धागे’, ‘तेरा मेरा साथ रहे’ और ‘एलओसी कारगिल’ जैसी फिल्में। साउथ में ‘वामसी’ के सेट पर महेश बाबू से प्यार हुआ। पांच साल के रिश्ते के बाद शादी कर ली और दो बेटों की मां बनीं।
हालांकि, उनकी पहली वयस्क फिल्म ‘पूरब की लैला पश्चिम की छैला’ रिलीज नहीं हो सकी। आज नम्रता परिवार के साथ सुखी जीवन जी रही हैं, जो सच्ची खुशी की मिसाल है।