
पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस का बोलबाला है, ममता बनर्जी 2011 से सत्ता की कमान संभाल रही हैं, लेकिन मुर्शिदाबाद विधानसभा क्षेत्र उनके लिए कांटों भरी राह बना हुआ है। यहां 1951 से चले आ रहे 17 चुनावों में एक बार भी तृणमूल को जीत नसीब नहीं हुई। वर्तमान में यह सीट भाजपा के पास है।
मुर्शिदाबाद जिले में स्थित यह क्षेत्र (क्रमांक 64) मुर्शिदाबाद नगरपालिका, जियागंज अजीमगंज नगरपालिका और मुर्शिदाबाद-जियागंज सीडी ब्लॉक को समेटे हुए है। यह 11-मुर्शिदाबाद लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है।
इतिहास गवाह है कि नवाब मुर्शिद कुली खान के समय मुर्शिदाबाद बंगाल की राजधानी था। 1757 के प्लासी युद्ध में अंग्रेजों ने नवाब सिराजुद्दौला को हराया, जिसने ब्रिटिश राज की नींव रखी। शहर में निजामत किला (हजारद्वारी महल), मोती झील, मुरादबाग महल, कटरा मस्जिद, निजामत इमामबाड़ा जैसे स्थल नवाबी वैभव की याद दिलाते हैं।
आज कृषि, रेशम बुनाई, हस्तशिल्प, हाथीदांत नक्काशी और सोने-चांदी की कढ़ाई यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।
राजनीतिक पटल पर कांग्रेस ने 1951-72 तक छह बार बाजी मारी, 1962 में निर्दलीय जीरा। लेफ्ट फ्रंट और फॉरवर्ड ब्लॉक ने भी सफलता पाई। 2021 में भाजपा ने कमाल किया, जबकि मुस्लिम बहुल इस सीट पर तृणमूल खाली हाथ रही। यह ट्रेंड भविष्य की चुनौतियां रेखांकित करता है।