
बिहार के कैमूर जिले में स्थित प्राचीन मुंडेश्वरी मंदिर मकर संक्रांति के पावन पर्व पर भक्तों का श्रद्धा सागर बन जाता है। दो हजार वर्षों से अधिक पुराने इस मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और विशाल मेले का आयोजन श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
सूर्योदय के साथ ही मंदिर परिसर में घंटियों और शंखनाद गूंजने लगते हैं। पुजारीगण मां मुंडेश्वरी की काले पत्थर की मूर्ति को फूलों, चंदन और दूध से स्नान कराते हैं। तिल, गुड़ और खिचड़ी के भोग लगाए जाते हैं, जो फसल कटाई के मौसम का प्रतीक हैं।
मंदिर के आसपास फैले मेले में रौनक छाई रहती है। मिठाई की दुकानों से तिलकुट और लड्डुओं की खुशबू आती है, वहीं हस्तशिल्प, बर्तन और रंग-बिरंगे कपड़े बिक्री को उपलब्ध होते हैं। लोक नृत्य और भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
मां मुंडेश्वरी को दानवों का संहार करने वाली देवी माना जाता है। गुप्त कालीन इस मंदिर में भगवान शिव के साथ विराजमान मां की पूजा तांत्रिक परंपरा में होती है। पिंडदान और बलि प्रथा यहां की प्राचीन रीतियां हैं।
प्रशासनिक व्यवस्था चाक-चौबंद रहती है, जिसमें चिकित्सा शिविर और सुरक्षा उपाय शामिल हैं। सायंकालीन आरती के समय दीपों की झांकियां देखने लायक होती हैं। यह पर्व सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित कर पर्यटन को बढ़ावा देता है।