
मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को घोषणा की कि आने वाले समय में मुंबई विश्व स्तर की पूंजी का मुख्य द्वार बनकर उभरेगी। तीन दिवसीय वैश्विक आर्थिक सहयोग सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर उन्होंने कहा कि मुंबई और महाराष्ट्र वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करने में अग्रणी भूमिका निभाएंगे।
बहुध्रुवीय विश्व में केवल विश्वसनीय साझेदारियां ही सफल हो सकती हैं, यह विचार सीएम ने रखा। ‘ट्रस्टेड ग्लोबलाइजेशन’ के दौर में महाराष्ट्र का सामरिक महत्व बढ़ा है। राज्य भारत की जीडीपी में 14-15 प्रतिशत का योगदान देता है, विदेशी निवेश में नंबर वन है, औद्योगिक उत्पादन का 20 प्रतिशत और पश्चिमी बंदरगाहों से 60 प्रतिशत से अधिक कंटेनर ट्रैफिक संभालता है।
आर्थिक संप्रभुता का अर्थ सिर्फ आत्मनिर्भरता नहीं, बल्कि व्यापक व्यापार, उत्पादन क्षमता, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी शक्ति, रणनीतिक स्वतंत्रता और सहयोगी संबंधों का मिश्रण है। महाराष्ट्र इसी नीति पर चल रहा है।
भविष्य का विश्व कॉरिडोर आधारित होगा, जिसमें महाराष्ट्र की भूमिका केंद्रीय रहेगी। मुंबई पारदर्शिता, नियमन और समग्र विकास में अग्रसर है। समुद्री व्यापार, उद्यमशीलता और वैश्विक संबंधों की परंपरा वाले इस शहर से हम मजबूत, समावेशी आर्थिक व्यवस्था गढ़ेंगे। बहुध्रुवीय दुनिया अवसर है, जिसे महाराष्ट्र स्वीकार करने को तैयार है।
भविष्य की ताकत एआई, डेटा प्रबंधन, सेमीकंडक्टर चेन और कुशल मानव संसाधन से आएगी। राज्य में एआई पार्क, डेटा सेंटर और स्किल यूनिवर्सिटी विकसित हो रहे हैं। जलवायु परिवर्तन अब भू-राजनीतिक खतरा है। महाराष्ट्र ग्रीन हाइड्रोजन, सौर-पवन ऊर्जा, ग्रीन मोबिलिटी और सतत शहरों में भारी निवेश कर रहा है।
भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई की ताकत कनेक्टिविटी में है—सड़क से स्वेज तक, अटलांटिक से प्रशांत तक। पश्चिमी समुद्री क्षेत्र में स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट, नवी मुंबई एयरपोर्ट और वधावन पोर्ट इसे भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर का आधार बना रहे हैं। अफ्रीका, खाड़ी और एशिया से व्यापारिक रिश्ते मजबूत हो रहे हैं।