
बीईसीआईएल लोन फ्रॉड मामले में बड़ा झटका लगा है। मुंबई की विशेष अदालत ने मुख्य आरोपी प्रतीक कनकिया को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पांच दिवसीय हिरासत में भेज दिया है। यह कार्रवाई सरकारी उपक्रम के लाखों करोड़ के काले कारोबार को उजागर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
प्रतीक कनकिया पर आरोप है कि उसने शेल कंपनियों के जाल बुनकर बीईसीआईएल से फर्जी लोन मंजूर कराए। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन यह संस्था ई-गवर्नेंस प्रोजेक्ट्स के लिए बनी थी, लेकिन आंतरिक मिलीभगत से 500 करोड़ से अधिक की राशि हड़प ली गई।
ईडी की छापेमारी में फर्जी दस्तावेज, बैंक स्टेटमेंट्स और लग्जरी संपत्तियों के सबूत मिले। कनकिया के डुबई कनेक्शन से विदेशी लॉन्ड्रिंग का पर्दाफाश हुआ। अदालत ने बचाव पक्ष के तर्कों को खारिज करते हुए पूछताछ की जरूरत बताई।
यह घोटाला सरकारी उधार प्रक्रिया की कमजोरियों को सामने लाता है। बीईसीआईएल अधिकारियों पर रिश्वत लेने के आरोप हैं, जबकि बैंककर्मियों ने आंखें मूंद लीं। जांच एजेंसी पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए सख्ती बरत रही है।
कनकिया की गिरफ्तारी से अन्य प्रभावशाली लोगों पर दबाव बढ़ा है। संपत्ति जब्ती और पेMLA के तहत मुकदमा तय है। जनता को उम्मीद है कि करदाताओं का पैसा वापस आएगा और दोषियों को सजा मिलेगी।