
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति को बड़ा झटका लगा है। तृणमूल कांग्रेस के संस्थापकों में शुमार और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुकुल रॉय का सोमवार तड़के निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे 73 वर्ष के थे। परिवार के सदस्यों ने इसकी पुष्टि की है।
उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय के अनुसार, सुबह करीब डेढ़ बजे के बाद उनका स्वर्गवास हो गया। लंबे समय से विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे रॉय का इलाज चल रहा था, लेकिन डॉक्टरों को सफलता नहीं मिली।
मुकुल रॉय ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद साथी रहे। वे पार्टी के महासचिव थे और TMC के गठन में नौ प्रमुख नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने 1990 के अंत में चुनाव आयोग से मान्यता दिलाई। राज्य कांग्रेस के कई नेताओं का समर्थन मिला था।
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार में उन्होंने रेल मंत्री, जहाजरानी एवं जलमार्ग राज्य मंत्री तथा शहरी विकास राज्य मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले। लेकिन समय के साथ ममता से मतभेद बढ़े। महासचिव पद से हटाए गए और पार्टी से दूरी बन गई।
2017 में भाजपा में शामिल हो गए और राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया। 2021 विधानसभा चुनाव में कृष्णानगर उत्तर से भाजपा प्रत्याशी के रूप में जीते। लेकिन TMC की जीत के कुछ दिन बाद वापस लौट आए। विधायक पद नहीं छोड़ा।
स्पीकर बिमान बंदोपाध्याय ने भाजपा की अयोग्य घोषित करने की मांग ठुकराई और उन्हें लोक लेखा समिति का चेयरमैन बनाया। कलकत्ता हाईकोर्ट ने 12 नवंबर 2024 को सदस्यता रद्द की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 16 जनवरी 2025 को रोक लगा दी।
राजनीतिक उलटफेरों के प्रतीक रॉय की मौत पर सभी दल श्रद्धांजलि दे रहे हैं। उनकी चतुराई और रणनीति बंगाल राजनीति का अभिन्न हिस्सा बनी रहेगी।