
मध्य प्रदेश पुलिस ने अपनी तत्परता और कुशलता का शानदार उदाहरण पेश किया है। मात्र सात दिनों में 45 लापता व्यक्तियों जिसमें बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं, को उनके परिजनों से सकुशल मिला दिया। यह अभियान पुलिस की सार्वजनिक सुरक्षा के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
भोपाल, इंदौर, ग्वालियर जैसे जिलों से लापता शिकायतें प्राप्त हुईं। थानों, साइबर सेल और सामुदायिक टीमों ने दिन-रात एक कर एकीकृत प्रयास किए। सीसीटीवी फुटेज, सोशल मीडिया अलर्ट और जन सहयोग से कई सफलताएं हासिल हुईं।
उज्जैन का एक 10 वर्षीय बालक खेलते हुए भटक गया था, जिसे 24 घंटों में ट्रैक कर परिवार को सौंपा गया। डिमेंशिया से ग्रस्त बुजुर्गों को बस स्टैंड व बाजारों से खोजा गया। पुलिस महानिदेशक ने टीमों की सराहना की और हर जिले में लापता डेस्क स्थापित करने की घोषणा की।
मानसून से पूर्व अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। सामुदायिक पुलिसिंग कार्यक्रम तेज हो रहे हैं। यह सफलता अन्य राज्यों के लिए मिसाल है, जो तकनीक और मानवीय संवेदना का बेहतरीन संगम दिखाती है।