
भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य के विकास परक प्रयासों में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि इसमें किसी भी सूरत में कोई कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राजधानी के रवींद्र भवन में लोक निर्माण विभाग के अधीन मध्यप्रदेश भवन विकास निगम द्वारा आयोजित एकदिवसीय क्षमता विकास कार्यशाला में उन्होंने सभी संबंधितों से पूर्ण निष्ठा का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने निर्माण को ईंट-पत्थर से परे एक सृजनात्मक कला करार दिया। उन्होंने दीर्घकालिक योजनाओं और उत्कृष्ट दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया, ताकि बदलते युग की मांगों के अनुरूप हर प्रोजेक्ट में सर्वसम्मति और उच्च गुणवत्ता झलके। ‘प्रदेश के उत्थान के लिए हमें अपनी पूरी ताकत झोंकनी होगी, बिना किसी स्तर पर गुण से समझौता किए,’ उन्होंने जोर देकर कहा।
यादव ने वैचारिक जड़ता से बचने और नई तकनीकों से जुड़ने के लिए कौशल उन्नयन को जरूरी ठहराया। ऐसी कार्यशालाएं अभियंताओं को नई स्फूर्ति देती हैं। पीएम गतिशक्ति योजना के तहत लोक निर्माण विभाग नवीनताओं को साकार कर रहा है, जहां इंजीनियर भगवान विश्वकर्मा के रूप में उभरे हैं। पिछले दो वर्षों में सांदीपनि विद्यालय से लेकर सड़कें, पुल, स्टेडियम और भवन जैसे विशालकाय प्रोजेक्ट पूरे किए गए हैं।
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने इसे विभाग की सुधार यात्रा का प्रतीक बताया। कार्यशाला में प्रशिक्षण कैलेंडर, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट मैनुअल जारी हुए और पीएमएस पोर्टल-2.0 लॉन्च किया गया। साथ ही सीआरआरआई, आईएएचई, ईएससीआई, आईआईटी मुंबई और एसपीए भोपाल के साथ एमओयू साइन हुए। यह कदम मध्य प्रदेश को बुनियादी ढांचे में अग्रणी बनाने की दिशा में मजबूत कदम है।