
उज्जैन, 11 फरवरी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने श्री महाकाल वन मेला 2026 का शुभारंभ करते हुए कहा कि वन उत्पादों के माध्यम से राज्य के आदिवासी समुदायों का आर्थिक सशक्तीकरण सुनिश्चित होगा। भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली में बाबा महाकाल और मां हरसिद्धि की कृपा से आयोजित यह मेला भोपाल के वन मेले के बाद उज्जैन में लगाया गया है।
वन सदियों से स्वास्थ्य का आधार रहे हैं। इस मेले से वनोत्पादों की जानकारी बढ़ेगी और मेहनती आदिवासी भाइयों-बहनों को आर्थिक मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वन हमारी प्राचीन आयुर्वेदिक परंपरा का प्रतीक हैं। यह मेला प्राकृतिक जीवनशैली का विस्तार है, जो आरोग्य का भव्य आयोजन है।
मेले में 50 से अधिक वैद्य चिकित्सा सेवाएं दे रहे हैं। महुआ आधारित उच्च कोटि के उत्पाद भी उपलब्ध हैं। सनातन संस्कृति में वन स्वास्थ्य और संस्कृति के मूल हैं। रामायण के संजीवनी प्रसंग से प्राचीन भारत के वन ज्ञान का प्रमाण मिलता है।
धन्वंतरि से चरक-सुश्रुत तक वनों की जड़ी-बूटियों से चिकित्सा विकसित हुई, जो आज विश्व स्तर पर मान्य हैं। च्यवनप्राश, अश्वगंधा, आंवला, हरड़-बहेड़ा जैसी औषधियां वन की निधि हैं। नीम, गिलोय, अर्जुन आदि रोग प्रतिरोधक हैं।
कोरोना काल में आयुष का महत्व सिद्ध हुआ। काढ़ा महंगी दवाओं पर भारी पड़ा। पीएम मोदी के नेतृत्व में आयुष वैश्विक हो गया। वनोपज अब वैश्विक चर्चा का विषय हैं।
आदिवासियों को विक्रय मंच मिला है। 6 दिवसीय मेले में 250 स्टॉल हैं—76 प्राथमिक वनोपज समितियों के, 76 निजी, 16 सरकारी, 16 फूड जोन। 50 स्टॉल निःशुल्क ओपीडी के लिए, जहां 50 डॉक्टर व 100 वैद्य सेवा देंगे। दोना-पत्तल, सबई रस्सी का प्रदर्शन हो रहा। प्रमुख उत्पाद : महुआ, साल बीज, आंवला आदि।
यह मेला प्रदेश की हरित धरोहर को मजबूत करेगा।
