
भोपाल/बिलासपुर। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विभिन्न संगठनों ने नए श्रम संहिताओं के खिलाफ बुलाई गई हड़ताल का पुरजोर विरोध किया है। उन्होंने इसे शुद्ध राजनीतिक रंग का बताया और ट्रेड यूनियनों पर अपने राजनीतिक आकाओं के इशारों पर मजदूरों का शोषण करने का आरोप लगाया।
42 वर्षों से ट्रेड यूनियनों और कल्याण संगठनों से जुड़े दीपक जायसवाल ने केंद्र के नए श्रम कानूनों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया है।
एनएफआईटीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष जायसवाल ने बताया कि 1947 के औपनिवेशिक काल के पुराने कानूनों को अद्यतन करने की लंबे समय से मांग थी। बोर्मा आयोग ने दो दशकों तक समीक्षा की, लेकिन पूर्व सरकारें बेरुखी बरतीं। भाजपा सरकार ने 100 से अधिक बैठकों के बाद सरलीकृत संहिताएं तैयार कीं।
महासचिव विराट जायसवाल ने कहा कि ये कानून ‘विकसित भारत 2047’ की नींव रखेंगे। गिग वर्कर्स से लेकर पारंपरिक मजदूरों तक सभी को लाभ मिलेगा।
उन्होंने हड़ताल को राजनीतिक साजिश करार दिया। कुछ संगठन प्रचार चला रहे हैं, लेकिन मजदूर हित इससे अछूते हैं। यूनियनें आकाओं के इशारे पर मजदूरों के कंधों पर बंदूक चला रही हैं।
‘फाइट फॉर राइट’ के उमंग बंसल ने कहा कि यह हड़ताल देश को प्रभावित नहीं करेगी। सरकार की योजनाएं श्रमिक हितैषी हैं। कमियों को हड़ताल से नहीं, चर्चा से दूर किया जाए।
बीएचईएल यूनियन के सतेंद्र कुमार ने इसे ‘एक देश-एक कानून’ की दिशा में कदम बताया। समान काम-समान वेतन और सुरक्षा सुनिश्चित हुई है।
हड़ताल के बीच ये आवाजें सुधारों के पक्ष में हैं, जो श्रम क्षेत्र में नई क्रांति ला सकती हैं।