
पूर्वी मेदिनीपुर के उपजाऊ डेल्टा क्षेत्र में बसा मोयना विधानसभा क्षेत्र पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीति का आईना है। कभी वामपंथियों का गढ़ रहे इस ग्रामीण इलाके में भाजपा ने कमाल कर दिया है।
तमलुक लोकसभा का हिस्सा यह सामान्य सीट मोयना ब्लॉक और तमलुक की पांच ग्राम पंचायतों को समेटे हुए है। 1951 से चले आ रहे 17 विधानसभा चुनावों में सीपीआई(एम) ने छह और सीपीआई ने पांच बार जीत हासिल की। कांग्रेस को तीन सफलताएं मिलीं।
2011 में टीएमसी के भूषण चंद्र डोलाई ने सीपीआई(एम) के शेख मुजीबुर रहमान को 9,957 वोटों से शिकस्त दी। 2016 में उन्होंने कांग्रेस के मानिक भौमिक को 12,124 वोटों से हराया। लेकिन 2021 में पूर्व क्रिकेटर अशोक डिंडा ने भाजपा के टिकट पर टीएमसी के संग्राम कुमार दोलुई को महज 1,260 वोटों से पछाड़ दिया।
भाजपा का वोट प्रतिशत 2011 के 2.59 से 2021 में उछाल मार गया। तमलुक लोकसभा में भी 2024 में भाजपा ने टीएमसी पर 9,948 वोटों की बढ़त बनाई। 2024 में 2,68,091 मतदाताओं के साथ वोटिंग 88 प्रतिशत के आसपास रही।
जनसांख्यिकी में अनुसूचित जाति 22.15 प्रतिशत और मुस्लिम 11.10 प्रतिशत हैं। 95 प्रतिशत ग्रामीण मतदाता हैं। मोयनगढ़ किले का इतिहास राजा लाउसेन और बाहुबलिंद्र से जुड़ा है।
हल्दी-रूपनारायण नदियों के किनारे धान, दालें, मछली पालन अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। बाढ़-चक्रवात चुनौतियां हैं, लेकिन तटबंध सहारा देते हैं। कोलकाता से 90 किमी दूर यह सीट 2026 में भाजपा-टीएमसी के बीच निर्णायक जंग का मैदान बनेगी। ग्रामीण वोटर फैसला करेंगे।