
लखनऊ, 21 जनवरी। अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि लोकतंत्र की जड़ें मजबूत करने के लिए सदनों को लंबे समय तक चलाना, सदस्यों की सक्रिय भूमिका और तकनीकी उपयोग अनिवार्य है।
उन्होंने जोर देकर कहा, ‘सदन जितना लंबा चलेगा, जनमुद्दों का हल उतना ही बेहतर होगा।’ सम्मेलन में विधानसभा संचालन पर गहन विचार-विमर्श हो रहा है।
मुख्य सुझावों पर सहमति बनी। पहला, सभी राज्यों में न्यूनतम कार्यदिवसों का निर्धारण। इससे जनता से जुड़े सवाल, बहस और कानून निर्माण को पर्याप्त समय मिलेगा। दूसरा, सदस्यों की उपस्थिति व भागीदारी बढ़ाना। हर विधायक को बोलने का अवसर, प्रशिक्षण, तर्कपूर्ण चर्चा और विधेयक अध्ययन की आदत विकसित करनी होगी।
कम सत्रों की शिकायत सभी राज्यों में है, जो बढ़ रही है। आदर्श 60 कार्यदिवस हैं, लेकिन यह सरकार, विपक्ष के सहयोग और शांत बहस पर निर्भर है। हंगामे से दोनों पक्ष नुकसान झेलते हैं। राजस्थान में सर्वदलीय बैठकें सकारात्मक परिणाम दे रही हैं।
हंगामा रोकने के लिए स्पीकर कक्ष में नेताओं की बैठक से गतिरोध समाप्त किया जा सकता है। जनमुद्दों पर आसान, राजनीतिक पर जटिल, लेकिन संवाद ही समाधान है।
निष्पक्षता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है, खासकर भूमिकाओं के बदलने पर। सामूहिक चर्चा बढ़ानी होगी।
राजस्थान पूरी तरह डिजिटल: प्रत्येक सदस्य के पास आईपैड, 80% उपयोग, समिति बैठकों में डिजिटल सिग्नेचर, गेट पास डिजिटल, डिजिटल म्यूजियम 1952 से इतिहास दर्शाता है। विधायकों को वक्तव्य का डिजिटल रिकॉर्ड उसी दिन मिलता है।
संवैधानिक कर्तव्य निभ रहे हैं, लेकिन लंबी गंभीर बहसों से जनाकांक्षाओं को पूरा करना बाकी है।
जनता से संदेश: विधायक जनता के प्रतिनिधि हैं, जुड़े रहें। पांच साल जागरूक रहें, जवाबदेही बढ़ेगी।